डिजिटल मूल्यांकन, एआई और बहुभाषी शिक्षा पर सरकार का फोकस, उच्च शिक्षा में तकनीकी बदलावों पर मंथन

इंदौर, 01 जून 2026। उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

सोमवार को इंदौर में आयोजित ‘डिजी100x मध्यप्रदेश समिट’ के उद्घाटन अवसर पर मंत्री परमार ने दावा करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। उन्होंने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे परीक्षा परिणामों की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार होगा।

मंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है तथा बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग आवश्यक है।

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आंतरिक मूल्यांकन और लिखित परीक्षा के वर्तमान 30:70 अनुपात को बदलकर 40:60 करने पर विचार करने की आवश्यकता बताई।

उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु महाविद्यालयों में एआई आधारित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने एआई टूल्स के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर बल दिया।

समिट में शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय प्रशासकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने एआई, डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट प्रशासन, ऑनलाइन मूल्यांकन और डेटा आधारित प्रबंधन जैसे विषयों पर विचार साझा किए।