नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर इंदौर में चर्चा

इंदौर। मोबाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों की मानसिकता और व्यवहार में तेजी से बदलाव ला दिया है। पढ़ाई के प्रति विद्यार्थियों की अरुचि बढ़ रही है और यह परिवार, शिक्षक व समाज सभी के लिए चुनौती बनती जा रही है कि बच्चों को सही दिशा में कैसे मार्गदर्शन दिया जाए। यह विचार गुरुवार को जाल सभागृह में डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए गए।

बैठक में नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों पर शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संगठनों के प्रतिनिधियों और पत्रकारों ने खुलकर चर्चा की।

फाउंडेशन के प्रबंध ट्रस्टी आलोक खरे ने बताया कि संस्था पहले ही शिक्षा नीति पर सुझाव केंद्र सरकार को भेज चुकी है, लेकिन अब बच्चों के मनोविज्ञान और जमीनी क्रियान्वयन की चुनौतियों को लेकर गंभीर संवाद की आवश्यकता है।

वरिष्ठ शिक्षाविद सुमन कोचर ने कहा कि बच्चों के मनोविज्ञान को केवल स्कूल बदल नहीं सकता, इसके लिए पालकों और समाज की सोच बदलनी होगी। रंजना नाइक ने मोबाइल व कोचिंग कल्चर को बच्चों के तनाव और पढ़ाई से दूरी का कारण बताया और काउंसलिंग पर जोर दिया।

पत्रकार नेहा जैन ने कहा कि नई शिक्षा नीति स्वागत योग्य है, लेकिन क्रियान्वयन में कठिनाई हो रही है। एआई जैसी चुनौतियों और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ स्कूलों में काउंसलिंग की जरूरत है।

प्राचार्य परिहार ने सुझाव दिया कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर संवारें, उन पर अपने विचार न थोपें।

डॉ. माया इंगले (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय) ने किताबों से अधिक व्यवहारिक ज्ञान देने की जरूरत बताई।

वहीं प्रो. असद खान (इस्लामिया कारिमिया कॉलेज) ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की रुचि के अनुसार अपने शिक्षण तरीके बदलने होंगे।

डॉ. ओपी जोशी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि शिक्षा बच्चों पर बोझ न बने बल्कि रोचकता से दी जाए। साथ ही, उन्होंने शिक्षा के विकेंद्रीकरण पर बल दिया।

कार्यक्रम में उद्योगपति मनोहर देव, अभ्यास मंडल अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता, श्याम पांडे, शफी शेख, प्रणिता दीक्षित सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संचालन कंचन तारे ने किया और आभार श्याम पांडे ने माना।