486 याचिकाओं पर सुनाया गया फैसला, पूरे 12 माह रोजगार और बकाया लाभ देने के आदेश
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए होमगार्ड सैनिकों के दो माह के कॉल ऑफ को समाप्त कर दिया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने 486 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि होमगार्ड जवान पूरे 12 माह रोजगार के हकदार हैं और उन्हें सभी बकाया लाभों का भुगतान किया जाए। इस आदेश का असर प्रदेश के करीब 10 हजार होमगार्ड सैनिकों पर पड़ेगा।
यह मामला नरसिंहपुर जिले की करेली तहसील निवासी अमरीश पाठक व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा था। इन याचिकाओं में राज्य सरकार के 13 अप्रैल 2016 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सैनिकों को साल में केवल 10 माह ही सेवाएं देने की अनुमति थी और शेष 2 माह कॉल ऑफ मान लिया जाता था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 1962 से लगातार सेवाएं देने के बावजूद हर वर्ष 2 से 3 माह कॉल ऑफ करना अवैधानिक है।
गौरतलब है कि इस मामले में 29 जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को सुनाए गए आदेश में बेंच ने कॉल ऑफ प्रणाली को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को वित्तीय लाभों का भुगतान करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.के. दीक्षित, अंजली बैनर्जी, विकास महावर, के.के. पांडेय, प्रवीण दुबे और जयलक्ष्मी अय्यर ने पैरवी की। वहीं राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और अधिवक्ता गौरव माहेश्वरी ने पक्ष रखा।
सेवानिवृत्ति आयु पर विचार को कहा
होमगार्ड सैनिकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि इस पर कोई निर्देश जारी नहीं किया जा रहा है। राज्य सरकार इस संबंध में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती है।
