उच्च न्यायालय और PMO ने दिखाई सख्ती, नोटिस जारी
इंदौर, 02 जुलाई 2025: इंदौर में बच्चों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सुखलिया स्थित एक एनजीओ द्वारा संचालित स्कूल ने इंस्टाग्राम पर मीम साझा करने के आरोप में नाबालिग छात्र को निष्कासित कर दिया और बाल आयोग के निर्देशों की अवहेलना की। वहीं दूसरी ओर, एक शासकीय स्कूल में चौथी कक्षा की छात्राओं से यौन दुर्व्यवहार और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगे हैं — जिनमें वर्षों से कार्रवाई लटकी हुई है। इन दोनों मामलों में अब क्रमश: उच्च न्यायालय और प्रधानमंत्री कार्यालय ने सख्ती दिखाई है।
इंस्टाग्राम मीम पर छात्र को निकाला, हाईकोर्ट में सुनवाई
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सुखलिया स्थित एनजीओ चेलावत एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित स्कूल, स्कूल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि स्कूल ने 4 फरवरी 2025 में एक छात्र को इंस्टाग्राम पर स्टाफ के खिलाफ मीम डालने की वजह से निलंबित किया और बाद में लिखित-मौखिक माफी के बावजूद “बेड करेक्टर” लिखकर निष्कासित कर दिया और टीसी थमा दी। जिस पर जारीकर्ता के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। मामला बाल आयोग तक पहुँचा, मामले की जांच के बाद आयोग ने 03 अप्रैल को स्कूल की कार्रवाई को अनुचित पाते हुए स्कूल को छात्र को पुनः प्रवेश देने के निर्देश दिए। स्कूल ने आदेश मानने से साफ इंकार कर दिया।
इसके बाद आयोग ने 15 अप्रैल को इंदौर कलेक्टर को छात्र को पुन: प्रवेश दिलाने और स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जुलाई से स्कूल शुरू हो चुके हैं लिहाजा अभिभावक को कोर्ट का रुख करना पड़ा। हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। आज याची के अधिवक्ता एन एल तिवारी ने अदालत को बताया स्कूल की सख्त एकपक्षीय कार्रवाई यह जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के साथ स्कूल शिक्षा संचनालय के आदेशों और बाल आयोग के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। कोर्ट ने स्कूल को नोटिस जारी किए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 जुलाई को हो सकती है ।
शासकीय स्कूल में बच्चियों के साथ अश्लीलता, पीएमओ ने भेजी जांच
इधर, एक शासकीय स्कूल में दो पुरुष शिक्षकों पर चौथी कक्षा की छात्राओं से अश्लील बातें करने, मारपीट करने और किराने की दुकान से सामान मंगवाने जैसे कार्य करवाने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपी शिक्षकों पर लैंगिक गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप है। प्रधानमंत्री कार्यालय PMO ने शिकायतकर्ता के डिमांड ऑफ जस्टिस याचिका पर संज्ञान लेते हुए मामले को मध्य प्रदेश सरकार को भेजा है।
याची जितेंद्र सिंह यादव के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने दावा किया कि इसके पहले भी 2016 में तत्कालीन एसडीएम नीता राठौर की पुरानी जांच रिपोर्ट में भी आरोपित शिक्षकों के विकृत मानसिक रवैये की पुष्टि हो चुकी है। पीएमओ ने शिकायत पर संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश सरकार को जांच का आदेश दिया है। अधिवक्ता कुन्हारे ने बताया कि आरटीआई कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र सिंह यादव ने 2019 में पुलिस थाना खुडैल, महिला थाना और एसपी को शिकायत दी, लेकिन पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज नहीं हुई। डॉ. राठौर ने कहा कि दोनों शिक्षकों को शांति बनाए रखने के लिए 1-1 लाख रुपये के बाउंड ओवर पर छोड़ा गया, पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अधिवक्ता अब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
बच्चों के अधिकारों पर हमला
इन दोनों घटनाओं ने शिक्षा संस्थानों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई मासूम इस तरह प्रताड़ना का शिकार न हो।
