इंदौर। मोबाइल गेम की लत ने एक और मासूम की जान ले ली। इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में रहने वाले 12 वर्षीय अकलंक जैन ने मात्र ₹3000 कटने पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह हादसा तब सामने आया जब घर में मौजूद लोगों ने कई घंटे बाद भी उसका कमरा नहीं खुलते देखा और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुए।

परिजनों ने बताया कि अकलंक छठवीं कक्षा का छात्र था और वह अक्सर अपनी मां के मोबाइल में फ्री फायर गेम खेला करता था। 30 जुलाई को ही उसने पूरे उत्साह के साथ अपना जन्मदिन मनाया था। लेकिन महज़ दो दिन बाद, 1 अगस्त को, गेम खेलते समय अचानक ₹3000 उसके अकाउंट से कट गए। इसके बाद अकलंक गहरे तनाव में आ गया और चुपचाप अपने कमरे में चला गया। जब वह काफी देर तक बाहर नहीं आया तो परिजन चिंतित हो गए। दरवाजा तोड़ा गया तो सामने एक हृदयविदारक दृश्य था—अकलंक फांसी के फंदे पर लटका हुआ था।

अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया है।

परिवार का कहना है कि अकलंक के पिता ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में व्यवसाय करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह बेटे की इस आत्महत्या से गहरे सदमे में हैं और सरकार से सख्त कदमों की मांग कर रहे हैं।

बड़े पिता का कहना है कि सरकार को ऐसे ऑनलाइन गेम्स को प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से पूरी तरह हटाने की नीति बनानी चाहिए, ताकि बच्चे इस तरह की मानसिक पीड़ा से बच सकें।

यह कोई पहला मामला नहीं है। मध्यप्रदेश समेत देशभर में ऑनलाइन गेम्स के चलते बच्चों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई बार बच्चे गेम के टास्क पूरे करने के लिए मां-बाप की जानकारी के बिना पैसे खर्च कर देते हैं, और पकड़े जाने के डर से इस तरह का खौफनाक कदम उठा लेते हैं।


📝 नोट: अगर आपके घर में बच्चे मोबाइल गेम्स खेलते हैं, तो कृपया सतर्क रहें। समय-समय पर उनसे संवाद करें, उनकी गतिविधियों पर नजर रखें और डिजिटल डिटॉक्स की ओर ध्यान दें।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।