पालकों की चिंता, स्वास्थ्य विभाग की चुनौती

इंदौर/भोपाल।
जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) से बचाव के लिए मध्य प्रदेश में चलाया जा रहा टीकाकरण अभियान एक बार फिर सुर्खियों में है। इंदौर समेत प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फरवरी 2025 से यह वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिससे बच्चों के अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।

इंदौर के कई सरकारी अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, पालक पिछले कई महीनों से बच्चों को वैक्सीन न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. तरुण गुप्ता ने बताया—
“1 अगस्त से वैक्सीन की आपूर्ति प्रभावित है। फिलहाल केंद्र से स्टॉक नहीं मिल पाया है, लेकिन आगामी एक सप्ताह में स्थिति सामान्य कर दी जाएगी और टीकाकरण सेवाएं बहाल हो जाएंगी।”

अभियान की पृष्ठभूमि

प्रदेश सरकार ने फरवरी 2024 में इंदौर, भोपाल, सागर और नर्मदापुरम जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस के खिलाफ विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया था। एक से पंद्रह वर्ष आयु वर्ग के करीब 25 से 37 लाख बच्चों को इस निशुल्क अभियान के तहत टीके लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया था।

शुरुआत में इंदौर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहले ही महीने में 1.17 लाख बच्चों को टीका लगाया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद अभियान की रफ्तार धीमी पड़ी और अब आपूर्ति बाधित होने से यह पूरी तरह थम गया है।

पालकों की चिंता

प्रभावित अभिभावकों का कहना है कि दिमागी बुखार जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का यह टीका बंद होना बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है। “स्कूलों और अस्पतालों में पूछताछ करने के बावजूद हमें पिछले कई महीनों से वैक्सीन नहीं मिल रही है,” एक पालक ने बताया।

सरकार के सामने चुनौती

जापानी इंसेफेलाइटिस मच्छरों से फैलने वाली खतरनाक बीमारी है, जो खासकर बच्चों को प्रभावित करती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए समय पर टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करना चुनौती है। फिलहाल जिला टीकाकरण अधिकारी के आश्वासन से उम्मीद है कि अगले सप्ताह से बच्चों का टीकाकरण दोबारा शुरू हो सकेगा।


📌 (NewsO2 डिजिटल डेस्क)

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।