इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने पुलिस कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने पुलिस कर्मियों पर मारपीट के आरोप वाले मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर इंदौर पुलिस को अब तक बॉडी-कैमरा से लैस क्यों नहीं किया गया।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता हर्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि 28 दिसंबर 2025 को रात करीब 1:30 बजे लसूड़िया थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की।
याचिकाकर्ता ने चोटों की फोटो भी कोर्ट में पेश की, लेकिन घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है — जबकि घटना शहर के व्यस्त इलाके में हुई बताई गई है।
याचिका में पुलिस पर कार्रवाई न होने और प्रशासन की निष्क्रियता को चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इससे पहले भी एक अन्य मामले में राज्य सरकार को पुलिसकर्मियों को बॉडी-कैमरा उपलब्ध कराने पर विचार करने को कहा गया था, लेकिन उस पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ।
कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को निर्देश दिए कि
- मामले में स्पष्ट निर्देश लेकर आएं
- इंदौर जोन-2 के डीसीपी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित किया जाए
- बताया जाए कि पुलिस यूनिफॉर्म पर बॉडी-कैमरा क्यों नहीं लगाए जा सकते
अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को होगी।
क्यों अहम है यह मामला
- पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल
- हिरासत/मारपीट के आरोपों की जांच में तकनीकी साक्ष्य की कमी
- बॉडी-कैमरा लागू करने पर न्यायालय का दबाव
- प्रदेश-भर की पुलिस व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना
यह आदेश केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं, बल्कि पुलिस जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के बड़े सवाल को सामने लाता है।
