मुख्यमंत्री के अधीन पुलिस, फिर भी बेलगाम अफसरशाही

इंदौर, न्यूजओ2, 16 जुलाई 2025: मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार को एक मजदूर की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ठेकेदार ने डंडे से पीट पीट कर मजदूर को मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं मृतक मजदूर के परिजन घटना के बाद पुलिस थाने में एफआईआर कराने की जद्दोजहद करते रहे। वे पुलिस के दुर्व्यवहार से इतने आहत थे कि शव को सड़क पर रखकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर दी। इसी घटना को कवर करने पहुंचे पत्रकारों को मृतक के परिजनों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर करना, गिरफ्तार करना तो दूर थाने में उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया है। परिजनों ने आरोप लगाया कि आरोपियों को थाने में चाय पिलाई गई और ससम्मान वापस जाने दिया गया। इन्हीं गंभीर आरोपों को लेकर मौके पर मौजूद एक स्थानीय पत्रकार ने जब पुलिस के आला अधिकारी से सवाल पूछा तो तमतमाए अधिकारी ने बेहद अभद्र लहजे में कहा, “ तुम्हारी औकात क्या है?”

कलेक्टर की जनसुनवाइयों में भी गूंजता है पुलिस की लापरवाही

यह पूरी तस्वीर उस शहर की है जहां के प्रभारी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव हैं। और जिस पुलिस महकमे के अधिकारी एडिशनल डीसीपी आलोक शर्मा का यह अहंकार सामने आया है वह पुलिस महकमा भी गृहमंत्री मोहन यादव के अधीन ही आता है। शहर की बिगड़ती कानून व्यवस्था, पुलिस पर मनमानी करने और अवैधानिक वसूली के आरोप कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी पुलिस जनसुनवाई में पत्रकारों को कवरेज से रोका जाना, जनसुनवाई के दौरान ही महिला पत्रकार को धमकाना जैसे कई संगीन मामले सामने आ चुके हैं।

जिला कलेक्टर की जनसुनवाइयों में भी आने वाले आवेदक स्थानीय पुलिस और उच्च पुलिस अधिकारियों की उदासीनता को लेकर आवेदन, निवेदन करते हैं। साफ है पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद पुलिस महकमे को शक्ति तो मिली लेकिन उसी शक्ति का दुरुपयोग जनता के सवाल पूछने वाले पत्रकारों, आंदोलन प्रदर्शन करने वाले एक्टिविस्टों की आवाज़ दबाने के लिए किया जा रहा है।

इन घटनाओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि इंदौर में क्या अब पुलिस पर सवाल उठाना गुनाह बन गया है?

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।