इंदौर, 14 जुलाई 2025
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने कृषि महाविद्यालय इंदौर के प्रभारी डीन डॉ. भरत सिंह द्वारा दायर रिट याचिका क्रमांक 26612/2025 को समयपूर्व (premature) मानते हुए खारिज कर दिया है।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पक्ष रखा। वहीं राज्य शासन की ओर से श्रेय राज सक्सेना, उप महाधिवक्ता (Dy.A.G) उपस्थित रहे। प्रतिवादी क्रमांक 3 और 4 की ओर से अधिवक्ता अभिनव धनोदकर ने पक्ष रखा।

याचिका में डॉ. भरत सिंह ने राज्य शासन द्वारा दिनांक 15 मई 2025 को गठित जाँच समिति एवं दिनांक 7 जुलाई 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। इन आदेशों में विश्वविद्यालय को उनकी नियुक्ति की जाँच के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि राज्य शासन को विश्वविद्यालय के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

राज्य शासन की ओर से प्रस्तुत किया गया कि विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 के तहत संचालित होता है, जिसकी धारा 11 के अंतर्गत राज्य शासन को निरीक्षण और जाँच का अधिकार प्राप्त है। साथ ही यह भी बताया गया कि अभी तक राज्य शासन द्वारा कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है, अतः याचिका समयपूर्व premature है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि राज्य शासन ने केवल जाँच के लिए समिति गठित की है और अभी तक विश्वविद्यालय की सक्षम प्राधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसके अलावा, आदेश सीधे याचिकाकर्ता को संबोधित भी नहीं थे। अतः वर्तमान स्थिति में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

अंत में न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय की सक्षम प्राधिकारी चाहे, तो याचिकाकर्ता के विरुद्ध कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।