फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति कटौती और अब MDC… शिक्षा व्यवस्था को अव्यवस्थित कर रही सरकार – AISEC

इंदौर, 4 सितंबर। मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्नातक छात्रों को मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स (MDC) के अंतर्गत अपने संकाय से अलग विषय चुनने की बाध्यता का आदेश जारी किया गया है। ऑल इंडिया सेव एजुकेशन कमेटी (AISEC), इंदौर ने इस आदेश को अतार्किक और अलोकतांत्रिक बताते हुए वापस लेने की मांग की है साथ ही बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।

AISEC जिला अध्यक्ष मान्या सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नाम पर लगातार प्रयोग हो रहे हैं और मध्यप्रदेश इसकी प्रयोगशाला बन चुका है। उनके अनुसार, लाखों छात्र बीच सत्र में प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को “ज्ञान के नाम पर अधकचरा पढ़ाई” परोसी जा रही है और स्कूल स्तर पर पहले ही समग्र शिक्षा की राह बंद कर दी गई है।

संगठन का कहना है कि फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति में कटौती, समय पर किताबें न मिलना, खराब परीक्षा परिणाम और कॉलेजों में बुनियादी ढांचे की कमी से शिक्षा व्यवस्था पहले ही पटरी से उतर चुकी है। अब MDC के नाम पर छात्रों पर जबरन बोझ डाला जा रहा है।

AISEC ने चेतावनी दी है कि छात्रों और शिक्षकों की राय लिए बिना थोपे गए इस आदेश का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।