इंदौर, 14 अक्टूबर 2025। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जैन स्टडीज (Center for Jain Studies) द्वारा “जैनिज्म और भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को खंडवा रोड स्थित विश्वविद्यालय के राजमाता देवी ऑडिटोरियम में गरिमामय वातावरण में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सुश्री रोमिका जैन द्वारा मंगलाचरण एवं नवकार मंत्र से हुई।
जैन अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. रजनीश जैन ने स्वागत भाषण में बताया कि यह केंद्र प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य जैन दर्शन, संस्कृति और साहित्य पर शैक्षणिक अनुसंधान एवं संवाद को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा कि केंद्र में शीघ्र ही ई-लाइब्रेरी, कॉम्प्यूटर लैब, ऑनलाइन कोर्स और शोध सुविधाएं प्रारंभ की जाएंगी, जो समाज में समावेशी और मानवीय मूल्यों के प्रसार में सहायक होंगी।
कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि जैन अध्ययन केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा के उन मूल्यों को पुनर्स्थापित करेगा, जो अनेकांतवाद, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों पर आधारित हैं। उन्होंने इसे शोध और शिक्षा के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कुलगुरु सिंघई ने बताया कि 2700 करोड़ की ग्रांट केंद्र सरकार से मिली है। शुरुआत शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स से की जाएगी। शास्त्रों का ज्ञान रखने वाले शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी। जगह चिन्हित कर इमारत का निर्माण किया जाएगा। अगले साल से पूरी तरह से कोर्सेस के शुरू होने की संभावना है।
मुख्य अतिथि इंदर सिंह परमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि जैन दर्शन का योगदान अत्यंत वैज्ञानिक एवं दार्शनिक रहा है। उन्होंने कहा –
“जगदीश चंद्र बोस ने जैसे वनस्पतियों में चेतना का प्रमाण दिया, वैसे ही जैन दर्शन ने प्रत्येक जीव में चेतना के अस्तित्व को स्वीकार किया है। यह भारतीय चिंतन की गहराई का प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह के सिद्धांत आज भी समाज में नैतिकता और समरसता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर कुमार, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (MOMA), भारत सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में हमने अपनी मूलभूत जड़ों को पीछे छोड़ दिया है। जैन धर्म, पाली, प्राकृत और बौद्ध अध्ययन जैसे विषयों का पुनरुद्धार भारतीय ज्ञान प्रणाली को सशक्त करेगा।
सम्माननीय अतिथि प्रो. रेणु जैन, पूर्व कुलगुरु, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने कहा कि जैन दर्शन भारतीय श्रवण संस्कृति का अभिन्न अंग है, जिसमें गणित, खगोलशास्त्र और विज्ञान का गहन अध्ययन मिलता है। वहीं संयुक्त सचिव राम सिंह (MOMA) ने जैन दर्शन की विराटता और इसके मानवीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
सेमीनार में आयोजित दो तकनीकी सत्रों में प्रो. नलिन शास्त्री, प्रो. रेणु जैन, प्रो. ऋषभ चंद्र जैन, प्रो. रमेश यादव और प्रो. संगीता मेहता जैसे विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
वैलिडिक्टरी सत्र में जी.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS), इंदौर के निदेशक प्रो. नीतेश पुरोहित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सौ. रोमिका जैन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रजनीश जैन ने दिया।
