भोपाल/इंदौर, 17 मार्च 2026।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय भोपाल में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों और अनुरक्षण के लिए 4,525 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।
इसके साथ ही सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे जाने वाले गेहूं पर किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है।
उज्जैन में ऐलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी
मंत्रि-परिषद ने उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी (इंद्रा नगर) चौराहा से इंदौर गेट तक 4-लेन तथा निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2-लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण को मंजूरी दी है।
करीब 5.32 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के लिए 945 करोड़ 20 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
किसानों को बोनस और सरप्लस गेहूं का निस्तारण
कैबिनेट ने निर्णय लिया कि समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं में से भारत सरकार द्वारा स्वीकार नहीं की जाने वाली अतिरिक्त (सरप्लस) मात्रा का निस्तारण मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन खुले टेंडर के माध्यम से करेगा।
इस पर आने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। किसानों को बोनस राशि का भुगतान विभागीय बजट प्रावधान से किया जाएगा।
रीवा की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना
मंत्रि-परिषद ने रीवा जिले की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी दी है।
करीब 228 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से 7,350 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे जवा और त्योंथर तहसील के 37 गांवों को लाभ मिलेगा।
सड़क विकास कार्यक्रमों को निरंतरता
बैठक में कई सड़क विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वीकृतियां दी गईं। इनमें प्रमुख रूप से:
- मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-6 (2026–2031) के लिए 1,543 करोड़ रुपये
- मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-7 (2026–2031) के लिए 1,476 करोड़ रुपये
- एनडीबी वित्त पोषित पुल एवं सड़क निर्माण योजना की निरंतरता के लिए 50 करोड़ 10 लाख रुपये
- शासकीय आवास एवं विश्राम गृहों के रखरखाव के लिए 200 करोड़ 35 लाख रुपये
- कार्यालय भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनुरक्षण तथा शौर्य स्मारक संचालन के लिए 300 करोड़ 70 लाख रुपये
कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन
कैबिनेट ने मध्यप्रदेश भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम को एमएसएमई विभाग से हटाकर वित्त विभाग के अधीन करने का अनुमोदन दिया है। सरकार के अनुसार इससे राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा।
पशुपालन विभाग का नाम बदला
मंत्रि-परिषद ने पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम बदलकर “गौपालन एवं पशुपालन विभाग” करने की मंजूरी भी दी है। इसी के साथ संचालनालय का नाम भी संशोधित कर संचालनालय, गौपालन एवं पशुपालन किया जाएगा।
इन फैसलों को प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, कृषि समर्थन और प्रशासनिक पुनर्गठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
