– सरकार की रणनीति या असमंजस?

भोपाल, 31 जुलाई 2025
मध्यप्रदेश सरकार ने महाधिवक्ता कार्यालय में कार्यरत 158 लॉ ऑफिसर्स के कार्यकाल को एक माह के लिए और बढ़ा दिया है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब 31 जुलाई को इन अधिकारियों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा था।

यह विस्तार महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की तैयारी और रणनीति पर कई सवाल भी खड़े कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अभी तक नई टीम के गठन को लेकर किसी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंच पाई है।

क्या चयन प्रक्रिया में कोई पेंच है? क्या सरकार मौजूदा लॉ ऑफिसर्स में ही “योग्य और भरोसेमंद” चेहरे तलाश रही है?

एक ओर जहां सरकार कह रही है कि नई नियुक्तियां जल्द की जाएंगी, वहीं नौकरशाही के गलियारों में “जल्द” शब्द का मतलब अक्सर लंबा इंतजार भी होता है।

लॉ ऑफिसर्स की सक्रियता बढ़ी
इस एक माह की मोहलत के साथ ही लॉ ऑफिसर्स के बीच बेचैनी भी बढ़ गई है। कई अधिकारी इसे “आखिरी अवसर” मानकर अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं—राजनीतिक संपर्क, पुराने रिश्ते और अनुशंसा के फ़ोन कॉल तेज हो गए हैं।

मूल प्रश्न यही है:
सरकार को इस फैसले को टालने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह कानूनी व्यवस्थाओं में स्थायित्व की कमी को दर्शाता है या फिर अंदरखाने चल रही खींचतान का संकेत है?

अब निगाहें टिक गई हैं उस सूची पर, जो यह तय करेगी कि कौन रहेगा, कौन जाएगा… और कौन इस एक माह के बोनस को असली जीत में बदल पाएगा।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।