मप्र पैरामेडिकल संस्थानों की जांच का आदेश, हाईकोर्ट ने QCI को सौंपी जिम्मेदारी

जबलपुर, 07 अगस्त 2025
मध्यप्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य के 166 पैरामेडिकल संस्थानों की जांच का जिम्मा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) को सौंपा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संस्थानों ने कोई गड़बड़ी नहीं की है, तो उन्हें जांच से डरने की आवश्यकता नहीं है।

यह आदेश लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया कि कई संस्थानों में एक ही भवन में नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।

इससे पहले नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े और मान्यता घोटाले को लेकर गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। अब पैरामेडिकल संस्थानों को लेकर भी इसी तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। पैरामेडिकल काउंसिल का कहना है कि संबंधित मामलों की जांच कलेक्टर स्तरीय समिति और सीबीआई पहले से कर रही है, इसलिए QCI जांच की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि हाईकोर्ट ने यह सवाल उठाया कि अगर संस्थान दोषमुक्त हैं, तो उन्हें स्वतंत्र एजेंसी की जांच से परहेज क्यों है? कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “जब जांच एजेंसियों के अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की ज़रूरत और अधिक बढ़ जाती है।”

हाईकोर्ट ने सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और पूछा है कि बार-बार न्यायालय को हस्तक्षेप क्यों करना पड़ रहा है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को निर्धारित की है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।