मध्यप्रदेश में स्टांप शुल्क दरों में संशोधन, कई दस्तावेज़ होंगे महंगे
भोपाल, 31 जुलाई 2025
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को “भारतीय स्टांप (मप्र संशोधन) विधेयक, 2025” प्रस्तुत किया गया। विधेयक के माध्यम से राज्य में विभिन्न दस्तावेज़ों पर लगने वाले स्टांप शुल्क में भारी वृद्धि की गई है। सरकार के अनुसार, यह संशोधन वर्ष 2014 के बाद मूल्य सूचकांक में आए बदलाव को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
🔹 मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
| दस्तावेज़ का प्रकार | पहले शुल्क | संशोधित शुल्क |
|---|---|---|
| शपथपत्र | ₹50 | ₹200 |
| कंसेंट डीड / एग्रीमेंट | ₹1,000 | ₹5,000 |
| प्रॉपर्टी एग्रीमेंट (बिना कब्ज़ा) | ₹1,000 | ₹5,000 |
| निर्माण एग्रीमेंट (₹50 लाख तक) | ₹500 | ₹1,000 |
| निर्माण एग्रीमेंट (₹50 लाख से अधिक) | — | 0.2% स्टांप शुल्क |
| रजिस्ट्री में संशोधन | ₹1,000 | ₹5,000 |
| पार्टनरशिप डीड | ₹2,000 | ₹5,000 |
| पावर ऑफ अटॉर्नी (एक ट्रांजेक्शन) | ₹1,000 | ₹2,000 |
| पावर ऑफ अटॉर्नी (एक से अधिक ट्रांजेक्शन) | ₹5,000 | ₹5,000 |
| रिवॉल्वर/पिस्टल लाइसेंस | ₹5,000 | ₹10,000 |
| नवीनीकरण | ₹2,000 | ₹5,000 |
| ट्रस्ट संपत्ति दस्तावेज़ | ₹1,000 | ₹5,000 |
🔹 अन्य प्रावधान:
- अधूरे स्टांप शुल्क पर 1% पेनल्टी और 1% मासिक ब्याज वसूला जाएगा।
- बैंकों द्वारा संपत्ति विमोचन की सूचना सीधे रजिस्ट्रार कार्यालय को दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया सरल होगी।
🔹 सरकार का पक्ष:
राज्य सरकार का कहना है कि पिछले एक दशक में मुद्रास्फीति और बाजार दरों में बदलाव आया है, जिससे स्टांप शुल्क में संशोधन आवश्यक हो गया था।
🔹 जनता पर संभावित प्रभाव:
इस संशोधन से आम नागरिक, किसान, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवारों को दस्तावेज़ तैयार कराने में अधिक लागत वहन करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अनौपचारिक दस्तावेज़ीकरण की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।
