इंदौर दूषित पानी कांड:

इंदौर, 02 जनवरी 2025: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं रही, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने का मामला बनती जा रही है। उल्टी-दस्त की शिकायतों के बीच सामने आए हालात ने नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का सार्वजनिक बयान — ऐसे सिस्टम में काम करना संभव नहीं — राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

महापौर ने कलेक्टर को भेजा मैसेज, सुनवाई नहीं ?

रेसीडेंसी कोठी में आयोजित बैठक के दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि उन्होंने दो दिन पहले ही कलेक्टर को संदेश भेजकर भागीरथपुरा में फैल रही बीमारी और दूषित पानी की स्थिति से अवगत कराया था। उनका कहना है कि इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस दावे के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि शहर का निर्वाचित प्रमुख लगातार चेतावनी दे रहा था, तो फिर स्थिति गंभीर होने से पहले कदम क्यों नहीं उठाए गए।

सिस्टम पर सवाल, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?

महापौर ने यह भी कहा कि अधिकारी न तो संवाद कर रहे हैं और न ही फाइलों पर समय से कार्रवाई हो रही है। निगम में हजारों शिकायतें लंबित होने की बात भी उन्होंने स्वीकार की। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब किसी जनप्रतिनिधि को खुद सिस्टम पर भरोसा नहीं है, तो नैतिक जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि अगर सिस्टम काम नहीं कर रहा, तो उसकी जवाबदेही तय करने की पहल किस स्तर से होगी।

भागीरथपुरा सहित आसपास की बस्तियों में बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएं उल्टी-दस्त से प्रभावित हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है, जबकि दूसरी ओर प्रशासनिक बैठकों में असंतोष और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नाराज़गी जताने से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि ठोस प्रशासनिक निर्णय और जवाबदेही तय करना जरूरी है।

दूषित पानी कांड के बाद अब शहर में यह मांग तेज हो रही है कि केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय हो। जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में नगर निगम, जल प्रदाय विभाग और जिला प्रशासन — सभी की भूमिका की जांच जरूरी मानी जा रही है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।