इंदौर, 21 जनवरी 2026: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में 20 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई। यह मामले WP No. 50628/2025, 50641/2025, 247/2026 और 496/2026 से संबंधित हैं, जिनमें भागीरथपुरा सहित इंदौर के अन्य क्षेत्रों में जल प्रदूषण, प्रशासनिक लापरवाही और जनहानि के मुद्दे उठाए गए हैं ।
इंदौर उच्च न्यायालय के ऑर्डर के मुताबिक राज्य शासन द्वारा जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ को बताया गया कि राज्य सरकार ने 19 जनवरी 2026 के आदेश से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो भागीरथपुरा में पेयजल दूषण के कारणों, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम तथा जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही की जांच करेगी। याचिकाकर्ताओं ने इस समिति पर आपत्ति जताते हुए इसे मात्र EYE WASH औपचारिक कदम बताया ।
राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम द्वारा 6 जनवरी 2026 के अंतरिम आदेश के पालन को लेकर प्रस्तुत की गई Status रिपोर्ट पर याचिकाकर्ताओं ने असंतोष जताया और कहा कि निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने रिपोर्ट पर प्रति उत्तर (Response) दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया ।
हाईकोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि याचिकाकर्ताओं ने रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना जताई है, विशेष रूप से भागीरथपुरा में अलग पेयजल पाइपलाइन बिछाने से जुड़े टेंडर दस्तावेजों और एम.पी. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जल सैंपल रिपोर्ट को लेकर। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर, इंदौर और नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया कि संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित अभिरक्षा (safe custody) में रखे जाएं ।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 6 जनवरी 2026 को दिए गए अंतरिम निर्देशों का सख्ती से पालन जारी रखा जाए और राज्य सरकार व नगर निगम अगली सुनवाई में अतिरिक्त प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगी। इस दौरान राज्य के मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे ।
